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श्लोक 2.5.122  |
ব্রহ্মা-মহেশ্বর-বন্দ্য যদ্যপি
কমলাতবু তাঙ্র স্বভাব চরণ-সেবা-খেলা |
ब्रह्मा-महेश्वर-वन्द्य यद्यपि
कमलातबु ताङ्र स्वभाव चरण-सेवा-खेला |
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| अनुवाद |
| यद्यपि लक्ष्मी की पूजा ब्रह्मा तथा शिव द्वारा की जाती है, किन्तु उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति परमेश्र्वर के चरणकमलों की सेवा करने की है। |
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| Although Lakshmi is worshipped by Brahma and Shiva, her natural inclination is to serve the lotus feet of the Supreme Lord. |
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