श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  2.5.122 
ব্রহ্মা-মহেশ্বর-বন্দ্য যদ্যপি
কমলাতবু তাঙ্র স্বভাব চরণ-সেবা-খেলা
ब्रह्मा-महेश्वर-वन्द्य यद्यपि
कमलातबु ताङ्र स्वभाव चरण-सेवा-खेला
 
 
अनुवाद
यद्यपि लक्ष्मी की पूजा ब्रह्मा तथा शिव द्वारा की जाती है, किन्तु उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति परमेश्र्वर के चरणकमलों की सेवा करने की है।
 
Although Lakshmi is worshipped by Brahma and Shiva, her natural inclination is to serve the lotus feet of the Supreme Lord.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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