श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  2.5.115 
শ্রী-লক্ষ্মণ-অবতারে অনুজ হৈযা
নিরবধি সেবেন অনন্ত, দাস্য পাইযা
श्री-लक्ष्मण-अवतारे अनुज हैया
निरवधि सेवेन अनन्त, दास्य पाइया
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण के रूप में अपने अवतार में, अनंत भगवान के छोटे भाई हैं और हमेशा भगवान की सेवा में लगे रहते हैं।
 
In his incarnation as Lakshmana, Ananta is the younger brother of the Lord and is always engaged in the service of the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)