श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  2.5.107 
সে যদি অদ্ভুত, তবে এহো অদভুত
নিশ্চয সকল এই কৃষ্ণের কৌতুক
से यदि अद्भुत, तबे एहो अदभुत
निश्चय सकल एइ कृष्णेर कौतुक
 
 
अनुवाद
अगर वह अद्भुत था, तो यह भी अद्भुत है। निश्चय जानो कि ये सब कृष्ण की क्रीड़ा-लीलाएँ हैं।
 
If that was amazing, this is amazing too. Know for sure that these are all the pastimes of Krishna.
तात्पर्य
यदि साधारण लोगों में रामचंद्र से दशरथ का आहुतियाँ स्वीकार करना विस्मय पैदा कर सकता है तो फिर इस प्रसंग से विस्मय क्यों नहीं होना चाहिए? ये सभी कृष्ण के अलौकिक करतूत हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)