श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  2.5.103 
পাইলা চৈতন্য নিতাই প্রভুর বচনে
হৈলা আনন্দ-ময ষড্-ভুজ-দর্শনে
पाइला चैतन्य निताइ प्रभुर वचने
हैला आनन्द-मय षड्-भुज-दर्शने
 
 
अनुवाद
भगवान के वचनों से निताई को होश आ गया। छः भुजाओं वाले रूप को देखकर वह आनंद से भर गया।
 
Nitai regained consciousness at the Lord's words. Seeing the six-armed form, he was filled with joy.
तात्पर्य
श्रीमान महाप्रभु के वचनों से नित्यानंद की बाह्य चेतना लौट आई। श्री गौरसुंदर के षड्भुजाधारी स्वरूप को देखकर वे आनंद-विभोर हो गए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)