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श्लोक 2.4.28  |
নিত্যানন্দ কোলে করি’ আছে বিশ্বম্ভর
বিপরীত দেখি’ মনে হাসে গদাধর |
नित्यानन्द कोले करि’ आछे विश्वम्भर
विपरीत देखि’ मने हासे गदाधर |
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| अनुवाद |
| जब गदाधर ने नित्यानंद को विश्वम्भर की गोद में देखा, तो वे भूमिकाओं के उलटफेर से आश्चर्यचकित हो गए और मन ही मन मुस्कुराये। |
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| When Gadadhara saw Nityananda in Visvambhara's lap, he was surprised by the reversal of roles and smiled to himself. |
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