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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन
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श्लोक 27
श्लोक
2.4.27
বাহ্য পাইলেন নিত্যানন্দ কত-ক্ষণে
হরি-ধ্বনি জয-ধ্বনি করে সর্ব-গণে
बाह्य पाइलेन नित्यानन्द कत-क्षणे
हरि-ध्वनि जय-ध्वनि करे सर्व-गणे
अनुवाद
कुछ समय पश्चात् नित्यानंद को पुनः चेतना आ गई और सभी भक्तों ने हरि नाम का जप किया।
After some time, Nityananda regained consciousness and all the devotees chanted the name of Hari.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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