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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन
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श्लोक 26
श्लोक
2.4.26
গৌরচন্দ্র নিত্যানন্দে স্নেহের যে
সীমাশ্রী-রাম-লক্ষ্মণ বহি নাহিক উপমা
गौरचन्द्र नित्यानन्दे स्नेहेर ये
सीमाश्री-राम-लक्ष्मण वहि नाहिक उपमा
अनुवाद
गौरचन्द्र और नित्यानन्द के बीच के स्नेह की तुलना राम और लक्ष्मण के बीच के स्नेह से नहीं की जा सकती।
The affection between Gaurchandra and Nityananda cannot be compared to the affection between Rama and Lakshmana.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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