श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 4: नित्यानंद की महिमा का प्रकटन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.4.25 
কি আনন্দ-বিরহ হৈল দুই জনে
পূর্বে যেন শুনিযাছি শ্রী-রাম-লক্ষ্মণে
कि आनन्द-विरह हैल दुइ जने
पूर्वे येन शुनियाछि श्री-राम-लक्ष्मणे
 
 
अनुवाद
दोनों के बीच जो खुशी का आदान-प्रदान हुआ वह वैसा ही था जैसा राम और लक्ष्मण के बीच सुना जाता है।
 
The joyous exchange between the two was similar to that heard between Rama and Lakshmana.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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