श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 98-99
 
 
श्लोक  2.3.98-99 
ভক্তি-রসে জড-প্রায হৈল বিহ্বল
লোকে বলে “হাডো ওঝা হৈল পাগল”
তিন মাস না করিলা অন্নের গ্রহণ
চৈতন্য-প্রভাবে সবে রহিল জীবন
भक्ति-रसे जड-प्राय हैल विह्वल
लोके बले “हाडो ओझा हैल पागल”
तिन मास ना करिला अन्नेर ग्रहण
चैतन्य-प्रभावे सबे रहिल जीवन
 
 
अनुवाद
हाड़ो ओझा प्रेमोन्मत्त होकर भावशून्य हो गए। लोगों ने कहा, "हाड़ो ओझा पागल हो गए हैं।" सचमुच, उन्होंने तीन महीने तक कुछ नहीं खाया; केवल श्री चैतन्य की कृपा से ही जीवित रहे।
 
Hado Ojha became intoxicated with love and became unconscious. People said, "Hado Ojha has gone mad." Indeed, he did not eat anything for three months; he survived only by the grace of Sri Chaitanya.
तात्पर्य
अपने पुत्र को भेंट करने के बाद, भक्त हाड़ो उपाध्याय व्यावहारिक रूप से पागल हो गए। वे भक्ति सेवा के रस से अभिभूत थे और सामान्य लोगों की दृष्टि में निष्क्रिय पदार्थ की तरह दिखाई पड़ते थे। तीन महीने तक हड़ाई पंडित ने सामान्य मानवों द्वारा लिए जाने वाले भोजन और पेय को स्वीकार करने से परहेज किया। फिर भी, उनके शरीर में कोई गिरावट नहीं आई जैसा कि सामान्य लोगों के मामले में होता है। यद्यपि वे जीवित रहे, वे निर्जीव बने रहे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)