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श्लोक 2.3.97  |
সে বিলাপ ক্রন্দন করিব কোন্ জনে?
বিদরে পাষাণ কাষ্ঠ তাহার শ্রবণে |
से विलाप क्रन्दन करिब कोन् जने?
विदरे पाषाण काष्ठ ताहार श्रवणे |
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| अनुवाद |
| उस ब्राह्मण के करुण क्रंदन का वर्णन कौन कर सकता है? उसकी ध्वनि से पत्थर और लकड़ी भी पिघल गए। |
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| Who can describe the pitiful cries of that Brahmin? Even stones and wood melted at the sound of their cries. |
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