श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  2.3.94 
আইলা সন্ন্যাসি-স্থানে নিত্যানন্দ-পিতান্যাসীরে
দিলেন পুত্র, নোইযা মাথা
आइला सन्न्यासि-स्थाने नित्यानन्द-पितान्यासीरे
दिलेन पुत्र, नोइया माथा
 
 
अनुवाद
तब नित्यानंद के पिता सिर झुकाए संन्यासी के समक्ष आये और अपने पुत्र को संन्यासी को सौंप दिया।
 
Then Nityananda's father came before the monk with his head bowed and handed over his son to him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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