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श्लोक 2.3.77  |
দৈবে এক-দিন এক সন্ন্যাসী সুন্দর
আইলেন নিত্যানন্দ-জনকের ঘর |
दैवे एक-दिन एक सन्न्यासी सुन्दर
आइलेन नित्यानन्द-जनकेर घर |
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| अनुवाद |
| एक दिन, भाग्यवश, एक आकर्षक संन्यासी हाड़ाई पंडित के घर आया। |
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| One day, by sheer luck, a charming monk came to Hadai Pandit's house. |
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