श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  2.3.62 
’মৌডেশ্বর’-নামে দেব আছে কত দূরে
যারে পূজিযাছে নিত্যানন্দ হলধরে
’मौडेश्वर’-नामे देव आछे कत दूरे
यारे पूजियाछे नित्यानन्द हलधरे
 
 
अनुवाद
इस गांव के पास मौदेश्वर शिव की एक मूर्ति है जिसकी पूजा नित्यानंद हलधर ने की थी।
 
Near this village there is an idol of Maudeshwar Shiva which was worshipped by Nityananda Haldhar.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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