श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.3.6 
আছুক দাসের কার্য, সে-প্রেম দেখিতে
শুষ্ক-কাষ্ঠ-পাষাণাদি মিলায ভুমিতে
आछुक दासेर कार्य, से-प्रेम देखिते
शुष्क-काष्ठ-पाषाणादि मिलाय भुमिते
 
 
अनुवाद
उसके प्रेम को देखकर सूखी लकड़ी और पत्थर भी पिघल जाते थे, उसके सेवकों की तो बात ही क्या?
 
Even dry wood and stones would melt at the sight of his love, what to say of his servants?
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd