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श्लोक 2.3.6  |
আছুক দাসের কার্য, সে-প্রেম দেখিতে
শুষ্ক-কাষ্ঠ-পাষাণাদি মিলায ভুমিতে |
आछुक दासेर कार्य, से-प्रेम देखिते
शुष्क-काष्ठ-पाषाणादि मिलाय भुमिते |
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| अनुवाद |
| उसके प्रेम को देखकर सूखी लकड़ी और पत्थर भी पिघल जाते थे, उसके सेवकों की तो बात ही क्या? |
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| Even dry wood and stones would melt at the sight of his love, what to say of his servants? |
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