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श्लोक 2.3.56  |
পাষণ্ডীরে আর কেহ ভয নাহি করে
হাটে ঘাটে সবে ’কৃষ্ণ’ গায উচ্চ-স্বরে |
पाषण्डीरे आर केह भय नाहि करे
हाटे घाटे सबे ’कृष्ण’ गाय उच्च-स्वरे |
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| अनुवाद |
| तब उन्हें नास्तिकों से भय नहीं रहा और वे सभी सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम तथा ऊंचे स्वर में कृष्ण का नाम जपने लगे। |
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| Then he was no longer afraid of the atheists and started chanting the name of Krishna openly and loudly in all public places. |
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