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श्लोक 2.3.54  |
এই-মত সর্ব-সেবকের ঘরে ঘরে
কৃপায ঠাকুর জানাযেন আপনারে |
एइ-मत सर्व-सेवकेर घरे घरे
कृपाय ठाकुर जानायेन आपनारे |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार प्रभु ने अपने सभी सेवकों के घरों में स्वयं को प्रकट किया। |
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| Thus the Lord revealed Himself in the homes of all His servants. |
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