श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 187
 
 
श्लोक  2.3.187 
সে আজানু দুই ভুজ, হৃদয সুপীন
তাহে শোভে সূক্ষ্ম যজ্ঞ-সূত্র অতি ক্ষীণ
से आजानु दुइ भुज, हृदय सुपीन
ताहे शोभे सूक्ष्म यज्ञ-सूत्र अति क्षीण
 
 
अनुवाद
उनके हाथ घुटनों तक पहुँचते हैं, और उनकी उभरी हुई छाती एक पतले सफेद ब्राह्मण धागे से सुशोभित है।
 
His hands reach down to his knees, and his bulging chest is adorned with a thin white Brahmin thread.
तात्पर्य
शब्द हृदय सुपीना उनकी उठी हुई छाती को इंगित करता है। शब्द अती क्षीण का अर्थ है "बहुत पतला"। ब्राह्मण का धागा उनकी उठी हुई छाती की तुलना में पतला है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)