श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 177
 
 
श्लोक  2.3.177 
বসিযাছে এক মহা-পুরুষ-রতন
সবে দেখিলেন—যেন কোটি-সূর্য-সম
वसियाछे एक महा-पुरुष-रतन
सबे देखिलेन—येन कोटि-सूर्य-सम
 
 
अनुवाद
वहाँ एक महान रत्न-सदृश पुरुष विराजमान थे। सबने देखा कि उनका तेज करोड़ों सूर्यों के समान था।
 
There sat a great jewel-like being. Everyone saw that his radiance was like that of millions of suns.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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