इस अवतार में भगवान नित्यानंद अत्यंत गोपनीय हैं। उन्हें केवल तभी देखा जा सकता है जब भगवान चैतन्य उन्हें प्रकट करें।
In this incarnation, Lord Nityananda is extremely secretive. He can only be seen when Lord Chaitanya reveals Himself.
तात्पर्य
केवल श्री चैतन्यदेव के प्रिय सेवक ही उनकी दया से श्री नित्यानंद की विशेषताओं को समझ सकते हैं। बद्धात्माओं के लिए श्री नित्यानंद के चरणकमलों की शरण लेना असंभव है। नित्यानंद के विषय में सच्चाई का एहसास केवल चैतन्य के दयालु रूप की कृपा से ही संभव है, जो की चैत्य-गुरु, या परमात्मा हैं। साधारण अज्ञानी लोग जो की चैतन्य के प्रति विमुख हैं, व्यर्थ में और घमंड से स्वयं को चैतन्य के भक्त कहकर, नित्यानंद के अति गोपनीय लीलाओं को समझ नहीं सकते हैं। जो लोग आध्यात्मिक चेतना के प्रति जागृत नहीं हैं, उनका नित्यानंद के अप्रकट सबसे रहस्यमयी लीलाओं में कोई प्रवेश नहीं है। अज्ञानी मूर्ख नित्यानंद के लीलाओं को देखकर घृणा प्रदर्शित करते हैं। यही कारण है कि उन्हें यमराज द्वारा दंडित किया जाता है और अंततः असीमित दुख प्राप्त होता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥