श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  2.3.150 
হরিষ বাডিল শুনি’ তাহার বচন
আপনারে বাসোঙ্ মুঞি যেন সেই-সম”
हरिष बाडिल शुनि’ ताहार वचन
आपनारे वासोङ् मुञि येन सेइ-सम”
 
 
अनुवाद
"उनके वचन सुनकर मैं बहुत प्रसन्न हुआ, और मैंने स्वयं को उनके समान समझा।"
 
"I was very happy to hear his words, and I considered myself like him."
तात्पर्य
महाप्रभु ने कहा, "उस व्यक्तित्व के वचन सुनकर मेरी खुशी बढ़ गई जिसे मैंने अपने सपने में देखा था। उसे देखते ही मुझे लगा जैसे कि 'मैं वही हूँ'।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)