श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान का मुरारी के घर में वराह रूप में प्रतिष्ठान और नित्यानंद से मिलन  »  श्लोक 146
 
 
श्लोक  2.3.146 
’এই বাডী নিমাঞি পণ্ডিতের হয হয?’
দশ-বার বিশ-বার এই কথা কয
’एइ बाडी निमाञि पण्डितेर हय हय?’
दश-बार विश-बार एइ कथा कय
 
 
अनुवाद
“उन्होंने दस-बीस बार पूछा, ‘क्या यह निमाई पंडित का घर है?’
 
“He asked ten or twenty times, ‘Is this Nimai Pandit’s house?’
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