भगवान अपने प्रति इतने आसक्त व्यक्ति को क्यों त्याग देते हैं? यह भगवान विष्णु और वैष्णवों का अकल्पनीय अधिकार है।
Why would the Lord abandon a person so attached to Him? This is the unimaginable right of Lord Vishnu and the Vaishnavas.
तात्पर्य
इस संबंध में यह प्रश्न किया जा सकता है कि अपने भक्तों से प्रेम करने वाले भगवान श्री नित्यानंद ने अपने पिता के प्रति आसक्ति पर ध्यान क्यों नहीं दिया? इसके उत्तर में यह कहा जा सकता है कि भगवान विष्णु और वैष्णवों की क्षमता अतुलनीय है। उनकी दक्षता मानवीय गणना से मापने से बाहर है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥