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श्लोक 2.28.74  |
কি হৈল সে বৈষ্ণব-গণের বিষাদ
কান্দিতে লাগিলা সবে করিঽ আর্ত-নাদ |
कि हैल से वैष्णव-गणेर विषाद
कान्दिते लागिला सबे करिऽ आर्त-नाद |
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| अनुवाद |
| वैष्णवों को कितना दुःख हुआ! वे सब दुःख से व्याकुल होकर जोर-जोर से रोने लगे। |
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| The Vaishnavas were so saddened! They all began to cry loudly, overwhelmed with grief. |
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