साक्षात् रूप से परमेश्वर के बंदे, परमेश्वर के साथ लीलाओं का भोग करते हैं, जबकि साक्षात वेद अपने जीवन के लक्ष्य, परमेश्वर के स्वरूप पर ध्यान करते हैं।