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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 57
श्लोक
2.28.57
দশ দিনান্তরে বা কি এখনে আমি
চলিলে ও কোন চিন্তা না করিহ তুমি
दश दिनान्तरे वा कि एखने आमि
चलिले ओ कोन चिन्ता ना करिह तुमि
अनुवाद
“चाहे मैं अभी जाऊँ या दस दिन बाद, तुम्हें विलाप नहीं करना चाहिए।
“Whether I leave now or ten days later, you shouldn’t lament.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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