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श्लोक 2.28.3  |
স্বেচ্ছাময মহেশ্বর কখনে কি করে
ঈশ্বরের মর্ম কেহ বুঝৈতে না পারে |
स्वेच्छामय महेश्वर कखने कि करे
ईश्वरेर मर्म केह बुझैते ना पारे |
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| अनुवाद |
| कोई भी परमेश्वर के कार्यकलापों को नहीं समझ सका, जो कि सभी का पूर्णतः स्वतंत्र स्वामी है। |
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| No one could understand the actions of God, who is the completely independent master of all. |
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