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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 184
श्लोक
2.28.184
তাঙ্হার আজ্ঞায আমি কৃপা-অনুরূপে
কিছু-মাত্র সূত্র আমি লিখিল পুস্তকে
ताङ्हार आज्ञाय आमि कृपा-अनुरूपे
किछु-मात्र सूत्र आमि लिखिल पुस्तके
अनुवाद
उनकी दयालु आज्ञा से मैंने इस पुस्तक में केवल संक्षिप्त वर्णन लिखा है।
With his kind permission, I have written only a brief description in this book.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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