श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.28.17 
গঙ্গা নমস্করিযা বসিলা গঙ্গা-তীরে
ক্ষণেক থাকিযা পুনঃআইলেন ঘরে
गङ्गा नमस्करिया वसिला गङ्गा-तीरे
क्षणेक थाकिया पुनःआइलेन घरे
 
 
अनुवाद
उन्होंने गंगा को प्रणाम किया, कुछ देर किनारे पर बैठे और फिर घर लौट आये।
 
He bowed to the Ganga, sat on the banks for some time and then returned home.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)