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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला
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श्लोक 167
श्लोक
2.28.167
এই তাহা সত্য করিলেন দ্বিজরাজ
এ মর্ম জানযে সব-বৈষ্ণব-সমাজ
एइ ताहा सत्य करिलेन द्विजराज
ए मर्म जानये सब-वैष्णव-समाज
अनुवाद
अब यह कथन श्रेष्ठ ब्राह्मणों द्वारा पूर्ण किया गया है। यह रहस्य वैष्णव समाज को भली-भाँति ज्ञात है।
Now this statement has been fulfilled by the best Brahmins. This secret is well known to the Vaishnava community.
तात्पर्य
महाभारत, दान-धर्म, विष्णु-सहस्त्र-नाम-स्तोत्र में उल्लेख है कि: [अगला श्लोक]
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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