श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 163
 
 
श्लोक  2.28.163 
দণ্ড-কমণ্ডলু দুই শ্রী-হস্তে উজ্জ্বল
নিরবধি নিজ-প্রেমে আনন্দে বিহ্বল
दण्ड-कमण्डलु दुइ श्री-हस्ते उज्ज्वल
निरवधि निज-प्रेमे आनन्दे विह्वल
 
 
अनुवाद
अपने हाथों में दण्ड और कामण्ड पकड़े हुए भगवान् प्रेम में विभोर हो गये।
 
Holding the staff and the bow in his hands, the Lord became overwhelmed with love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)