श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  2.28.150 
বসিলে ও প্রভু স্থির হৈতে না পারে
প্রেম-রসে মহা-কম্প, বহে অশ্রুধারে
वसिले ओ प्रभु स्थिर हैते ना पारे
प्रेम-रसे महा-कम्प, वहे अश्रुधारे
 
 
अनुवाद
भगवान जब बैठे भी, तो स्थिर नहीं रह सके। वे काँपने लगे और प्रेम के मारे उनकी आँखों से आँसू बहने लगे।
 
Even when the Lord sat down, he could not remain still. He began to tremble, and tears of love flowed from his eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)