श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  2.28.141 
ক্ষুর দিতে নাপিত সে চাঙ্চর-চিকুরে
মাথে হাত না দেয, ক্রন্দন-মাত্র করে
क्षुर दिते नापित से चाङ्चर-चिकुरे
माथे हात ना देय, क्रन्दन-मात्र करे
 
 
अनुवाद
नाई भगवान के घुंघराले बाल काटने में हिचकिचा रहा था। भगवान का सिर छूने से पहले ही वह रोने लगा।
 
The barber hesitated to cut the Lord's curly hair. He began to cry before he could even touch His head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)