श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  2.28.125 
ক্ষণেক সম্বরিঽ নৃত্য বৈসে বিশ্বম্ভর
বসিলেন চতুর্-দিকে সব অনুচর
क्षणेक सम्वरिऽ नृत्य वैसे विश्वम्भर
वसिलेन चतुर्-दिके सब अनुचर
 
 
अनुवाद
कुछ समय पश्चात् श्री विश्वम्भर ने अपने आप को नियंत्रित किया और अपने पार्षदों से घिरे हुए बैठ गये।
 
After some time, Shri Vishvambhar controlled himself and sat down surrounded by his councillors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)