श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  2.28.123 
আমাঽ-সবাকার প্রাণ বিদরে শুনিতে
ভার্যা বা জনননী প্রাণ ধরিব কে-মতে”
आमाऽ-सबाकार प्राण विदरे शुनिते
भार्या वा जनननी प्राण धरिब के-मते”
 
 
अनुवाद
“जब हमारा दिल भी टूट गया है तो उसकी माँ और पत्नी कैसे जीवित रहेंगी?”
 
“How will his mother and wife survive when our hearts are also broken?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)