श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  2.28.121 
“কেমনে ধরিব প্রাণ ইহার জননী
আজি তানে পোহাইল কি কাল-রজনী
“केमने धरिब प्राण इहार जननी
आजि ताने पोहाइल कि काल-रजनी
 
 
अनुवाद
"उसकी माँ कैसे बचेगी? कितनी भयानक रात उसने गुज़ारी होगी!"
 
"How will his mother survive? What a terrible night she must have had!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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