श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  2.28.113 
অর্বুদ অর্বুদ লোক শুনিঽ সেই-ক্ষণে
আসিযা মিলিলা নাহি জানি কোথা হনে
अर्बुद अर्बुद लोक शुनिऽ सेइ-क्षणे
आसिया मिलिला नाहि जानि कोथा हने
 
 
अनुवाद
लाखों-करोड़ों लोग वहाँ जमा हुए। किसी को पता नहीं था कि वे कहाँ से आए हैं।
 
Millions and millions of people gathered there. No one knew where they came from.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)