श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 28: भगवान का संन्यास ग्रहण लीला  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  2.28.100 
সর্ব-জীব-নাথ গৌরচন্দ্র জয জয
ভাল রঙ্গে সবে উদ্ধারিলে দযা-ময
सर्व-जीव-नाथ गौरचन्द्र जय जय
भाल रङ्गे सबे उद्धारिले दया-मय
 
 
अनुवाद
सबके स्वामी, दयालु भगवान गौरसुन्दर की जय हो! उन्होंने कुशलता से सभी का उद्धार किया।
 
All hail the merciful Lord Gaurasundara, the master of all! He skillfully rescued everyone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)