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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 27: भगवान का वियोग भाव को शांत करना
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श्लोक 36
श्लोक
2.27.36
এই-মত বিলাপ করযে শচী-মাতামুখ
তুলিঽ ঠাকুর না কহে কোন কথা
एइ-मत विलाप करये शची-मातामुख
तुलिऽ ठाकुर ना कहे कोन कथा
अनुवाद
जब माता शची ने इस प्रकार विलाप किया, तो भगवान ने न तो अपना सिर उठाया और न ही एक शब्द भी बोला।
When Mother Shachi lamented in this manner, the Lord neither raised His head nor uttered a word.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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