श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 27: भगवान का वियोग भाव को शांत करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.27.29 
প্রেম-শোকে কহে শচী, শুনে বিশ্বম্ভর
প্রেমেতে রোধিত কণ্ঠ, না করে উত্তর
प्रेम-शोके कहे शची, शुने विश्वम्भर
प्रेमेते रोधित कण्ठ, ना करे उत्तर
 
 
अनुवाद
शची प्रेम से विह्वल होकर बोल रही थीं। विश्वम्भर सुनते ही उनका गला रुँध गया और वे उत्तर देने में असमर्थ हो गए।
 
Shachi was speaking, overwhelmed with love. As soon as Vishvambhara heard this, his throat choked and he was unable to reply.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)