श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 27: भगवान का वियोग भाव को शांत करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.27.22 
“না যাইয না যাইয বাপ, মাযেরে ছাডিযা
পাপ জীউ আছে তোর শ্রী-মুখ চাহিযা
“ना याइय ना याइय बाप, मायेरे छाडिया
पाप जीउ आछे तोर श्री-मुख चाहिया
 
 
अनुवाद
"मेरे प्यारे बेटे, मत जाओ। अपनी माँ को मत छोड़ो। यह पापी इंसान सिर्फ़ तुम्हारा चेहरा देखकर ही ज़िंदा है।
 
"My dear son, don't go. Don't leave your mother. This sinful man is only alive by seeing your face.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)