লোক-শিক্ষা-নিমিত্ত সে আমার সন্ন্যাস
এতেকে তোমরা সব চিন্ত কর নাশ”
लोक-शिक्षा-निमित्त से आमार सन्न्यास
एतेके तोमरा सब चिन्त कर नाश”
अनुवाद
“मेरा संन्यास लोगों को शिक्षा देने के लिए है, इसलिए आप सभी को अपनी चिंता छोड़ देनी चाहिए।”
“My renunciation is to educate people, so you all should leave your worries.”
तात्पर्य
श्री गौरसुंदर ने लोगों को शिक्षित करने के लिए संन्यास स्वीकार किया। संन्यास लेने से उन्होंने भारत के विभिन्न भागों में विभिन्न लोगों को भगवान कृष्ण के साथ अपने लीलाओं को देखने के अवसर का उपयोग करने का समय व्यतीत किया। जब तक कि उन तथाकथित "गौड़ीय वैष्णवों" में पर्याप्त ज्ञान की कमी नहीं होती है, जो उनके बीच बहने वाले दुर्जेय आक्रामक विचार के कुछ हिस्से से संन्यास लेते हैं, वे कभी भी किसी भी शुभता को प्राप्त नहीं करेंगे। सामान्य लोगों के लिए मुख्य शिक्षा यह है कि भक्ति सेवा के लिए प्रतिकूल हर चीज को छोड़ देना है। यदि कोई भोग की भावना से भौतिक दुनिया को देखता है तो वह कभी भी भक्ति सेवा की आवश्यक प्रकृति को महसूस नहीं कर सकता है। चिंता के इस राज्य में, संभोग-वाद, भोग का दर्शन, प्रकट-सहजिया दर्शन में बदल जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥