|
| |
| |
श्लोक 2.26.85  |
এই মত প্রভুর অপূর্ব প্রেম-ভক্তি
মনুষ্য কি তাহা বর্ণিবারে ধরে শক্তি |
एइ मत प्रभुर अपूर्व प्रेम-भक्ति
मनुष्य कि ताहा वर्णिबारे धरे शक्ति |
| |
| |
| अनुवाद |
| भगवान की प्रेममयी भक्ति का यह अद्भुत प्रदर्शन था। क्या कोई मनुष्य इसका वर्णन कर सकता है? |
| |
| This was a wonderful display of loving devotion to the Lord. Can any human being describe it? |
| ✨ ai-generated |
| |
|