श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  2.26.85 
এই মত প্রভুর অপূর্ব প্রেম-ভক্তি
মনুষ্য কি তাহা বর্ণিবারে ধরে শক্তি
एइ मत प्रभुर अपूर्व प्रेम-भक्ति
मनुष्य कि ताहा वर्णिबारे धरे शक्ति
 
 
अनुवाद
भगवान की प्रेममयी भक्ति का यह अद्भुत प्रदर्शन था। क्या कोई मनुष्य इसका वर्णन कर सकता है?
 
This was a wonderful display of loving devotion to the Lord. Can any human being describe it?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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