श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 26: शुक्लाम्बर और विजय पर कृपा का वर्णन और भगवान की संन्यास की इच्छा  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  2.26.71 
বলরাম-বার্ণনা গাযেন সবে গীত
শুনিযা হযেন প্রভু আনন্দে মূর্চ্ছিত
बलराम-वार्णना गायेन सबे गीत
शुनिया हयेन प्रभु आनन्दे मूर्च्छित
 
 
अनुवाद
जब भक्तगण बलराम की महिमा का गान करते तो भगवान् परमानंद में अचेत हो जाते।
 
When the devotees sang the glories of Balarama, the Lord would become unconscious in ecstasy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)