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श्लोक 2.26.34  |
কি আনন্দ হৈল সে ভিক্ষুকের ঘরে
এ-মত কৌতুক করে প্রভু বিশ্বম্ভরে |
कि आनन्द हैल से भिक्षुकेर घरे
ए-मत कौतुक करे प्रभु विश्वम्भरे |
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| अनुवाद |
| उस भिखारी के घर में जो आनंद छाया हुआ था, उसका वर्णन कौन कर सकता है? भगवान विश्वम्भर की लीलाएँ ऐसी ही हैं। |
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| Who can describe the joy that pervaded that beggar's home? Such are the pastimes of Lord Visvambhara. |
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