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श्लोक 2.26.30  |
যে প্রসাদ পাযেন ভিক্ষুক শুক্লাম্বর
দেখুক অভক্ত যত পাপী কোটীশ্বর |
ये प्रसाद पायेन भिक्षुक शुक्लाम्बर
देखुक अभक्त यत पापी कोटीश्वर |
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| अनुवाद |
| पापी, अभक्त करोड़पतियों को वह दया देखने दो जो भिखारी शुक्लम्बर को मिली थी। |
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| Let the sinful, ungodly millionaires see the mercy that the beggar Shuklamber received. |
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