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श्लोक 2.26.145  |
বিধি বা নিষেধ কে তোমারে দেতে পারে
সেই সত্য, যে তোমার আছযে অন্তরে |
विधि वा निषेध के तोमारे देते पारे
सेइ सत्य, ये तोमार आछये अन्तरे |
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| अनुवाद |
| "तुम्हें कौन बता सकता है कि क्या करो और क्या न करो? तुम्हारे हृदय में जो कुछ है, वह अवश्यंभावी है।" |
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| "Who can tell you what to do and what not to do? Whatever is in your heart is inevitable." |
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