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श्लोक 2.25.81  |
এ সব নিগূঢ কথ যে করে শ্রবণ
অবশ্য মিলিব তারে কৃষ্ণ-প্রেম-ধন |
ए सब निगूढ कथ ये करे श्रवण
अवश्य मिलिब तारे कृष्ण-प्रेम-धन |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य इन गोपनीय विषयों को सुनता है, उसे निश्चय ही कृष्ण के प्रति परमानंद प्रेम की सम्पत्ति प्राप्त होती है। |
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| One who listens to these confidential matters certainly attains the wealth of ecstatic love for Krishna. |
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