श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  2.25.77 
শ্রী-মুখের পরম কারুণ্য-বাক্য শুনিঽ
চতুর্দিগে ভক্ত-গণ করে জয-ধ্বনি
श्री-मुखेर परम कारुण्य-वाक्य शुनिऽ
चतुर्दिगे भक्त-गण करे जय-ध्वनि
 
 
अनुवाद
भगवान के मुखकमल से निकले इन अत्यंत करुणामय वचनों को सुनकर चारों दिशाओं में भक्तगण जयकार करने लगे, “जय! जय!”
 
Hearing these extremely compassionate words uttered from the Lord's mouth, devotees in all directions started cheering, "Jai! Jai!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)