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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन
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श्लोक 51
श्लोक
2.25.51
প্রভু বলে,—“হেন সঙ্গ ছাডিব কে-মতে?”
এত বলিঽ মহাপ্রভু লাগিলা কান্দিতে
प्रभु बले,—“हेन सङ्ग छाडिब के-मते?”
एत बलिऽ महाप्रभु लागिला कान्दिते
अनुवाद
भगवान बोले, “मैं ऐसी संगति कैसे त्यागूँगा?” ये शब्द कहते हुए महाप्रभु रोने लगे।
The Lord said, “How can I give up such company?” Saying these words, Mahaprabhu began to cry.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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