श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.25.47 
সম্ভ্রমে বলযে প্রভু,—“কহ কত-ক্ষণ?”
শুনিলেন চারি দণ্ড রজনী যখন
सम्भ्रमे बलये प्रभु,—“कह कत-क्षण?”
शुनिलेन चारि दण्ड रजनी यखन
 
 
अनुवाद
प्रभु ने गंभीरता से पूछा, “यह घटना कितने समय पहले घटी थी?” तब उन्हें बताया गया कि यह घटना शाम को घटी थी।
 
The Lord seriously asked, “How long ago did this happen?” He was then told that it had happened in the evening.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)